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यदि तुम आ जाते एक बार :- फणीश्वर नाथ रेनू

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प्रेमचंद के बाद यदि कोई दूसरा कथाकार सामने आया तो वह है फणीश्वर नाथ रेणु। जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन के यथार्थ (हु-ब-हू) चित्रण को जनता के सामने रखा है। फणीश्वर नाथ रेणु एक आंचलिक कथाकार की कोटि में आते हैं , उन्होंने पूर्णिया जिले के औराही हिंगना ग्राम की भाषा क्षेत्र का वर्णन नहीं वरन पूरे जिले का वर्णन किया है । कोसी मैया की चपल तेज लहरों के साथ परतंत्रता और स्वतंत्रता का भी बखान किया है। फणीश्वरनाथ रेणु की रचनाएं "ठुमरी" और प्रतिनिधि कहानियों का संकलन है जिनमें गांव के जीते जागते जीवन का चित्रण मिलता है। रेणु जी गांव के चितेरे कथाकार हैं। इन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि आजादी के कई दशक तक पूर्णिया जिले के भाषा फूहड़ (फेनुगिलासी)  बोली कहा है। उनकी रचनाओं का मुख्य लक्ष्य है - जीवन में नवीनता का आग्रह करना ............ ऐसे थे कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु जिनके दुख दर्द भरे कहानियों में वह गीत आज भी नहीं भुलाया जा सकते हैं - *************** “ सजनव ा बैरी मैले न . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . दुखिया हो त ो सब को ई बांटे भ...

डॉक्टर खगेंद्र ठाकुर , आलोचक की स्मृतियां :- गुरुदेव को नमन

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                                          डॉ.खगेंद्र ठाकुर                                         प्रगतिशील मार्क्सवादी , कम्युनिस्ट पार्टी के अगुआ , साहित्यकार, आलोचक डॉ खगेंद्र ठाकुर को भुलाया नहीं जा सकता हैं। जिन्होंने 19वीं सदी से हिंदी जगत की सेवा कर प्रांत और राष्ट्र को एक नई दिशा से जुड़ा था उनकी रचनाओं में साम्यवादिता और ईश्वर के प्रति आस्था नजर आती है। मैंने जब सुबह अखबार खोला तो प्रथम पृष्ठ पर पढा डॉक्टर खगेंद्र ठाकुर आलोचक नहीं रहे यह समाचार देखकर मैं अचेत अवस्था में आ गया। 19वीं सदी 1991 से 1996 तक मुरारका महाविद्यालय सुलतानगंज भागलपुर में शिक्षा दान किया।  वह समय साहित्य के उत्कर्ष का समय था। उस समय डॉक्टर खगेंद्र ठाकुर बघेली प्रेस से गंगा नामक पत्रिका में लेखन व कई पत्र-पत्रिकाओं में आलोचक के रूप में उभरे हुए थे। उन दिनों जब मुरारका महाविद्यालय ...

सफल कथाकार मुंशी प्रेमचंद

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                                                          सफल कथाकार मुंशी प्रेमचंद  प्रत्येक युग में कोई ना कोई प्रतिभाशाली युग पुरुष कथाकार , कवि , आते हैं। जो अपने ही युग को नहीं वरन आने वाले युग को दूर से प्रभावित करते हैं। ऐसे प्रमुख कथाकार में प्रेमचंद का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। जिन्होंने अपने नाम से एक युग का श्रीगणेश किया था। प्रेमचंद ने अपने कहानियों में आदर्श उन्मुख और यथार्थवादी बातों का जिक्र मिलता है। प्रेमचंद के पूर्व भी कथा लिखी जा रही थी , लेकिन प्रेमचंद की प्रतिभा इतनी प्रखर थी कि आज तक उसे भुलाया नहीं जा सकता है। प्रेमचंद ने जीवन शैली की धारा से जुड़ कर लिखना प्रारंभ किया जबकि अन्य साहित्यकार कवियों ने जीवन धारा से अलग हटकर लिखा। सन 1915 में प्रेमा वरदान प्रेमचंद का प्रकाशित हुआ जिसमें ग्रामीण जीवन के बृहद चित्रण का वर्णन मिलता हैं। इस प्रकार के उपन्यासों में स्वतंत्रता से पूर्व भारत के मध्यम वर्ग का वर्...

मुंशी प्रेमचंद

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लेखक परिचय  :- सर्वश्रेष्ठ उपन्यासकार कहानीकार प्रेमचंद का जन्म सन १८८० (1880)में बनारस लहरी गांव में हुआ था। इनका वास्तविक नाम धनपत राय था। घर के आर्थिक तंगी तथा पिता की असामयिक मौत के कारण इनका जीवन अभाव में बीता। इन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, परंतु गांधी जी से प्रभावित हो असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। इनके बाद में पूरी तरह से लेखक कार्य के प्रति समर्पित हो गए। इन्होंने गांव और शहर में जिस परिवेश को देखा उसी का वर्णन अपनी रचनाओं में किया है। इनकी रचनाओं के विषय किसानों और मजदूरों की शोचनीय स्थिति , दलितों का शोषण, समाज में नारी की दुर्दशा, स्वतंत्रता आंदोलन आदि से संबंधित है। इनकी भाषा सरल, सजीव तथा मुहावरेदार है। इन्होंने अपनी रचनाओं मैं अरबी ,फारसी और अंग्रेजी में प्रचलित शब्दों का प्रयोग कुशलता पूर्वक किया है। इन्होंने 'हंस', 'जागरण', 'माधुरी' आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। सन् 1936 मैं इस महान कथाकार का देहांत हो गया। रचनाएं- इनकी कहानियां 'मानसरोवर'के आठ भागों मेंं संकलित हैैं उपन...