यदि तुम आ जाते एक बार :- फणीश्वर नाथ रेनू
प्रेमचंद के बाद यदि कोई दूसरा कथाकार सामने आया तो वह है फणीश्वर नाथ रेणु। जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन के यथार्थ (हु-ब-हू) चित्रण को जनता के सामने रखा है। फणीश्वर नाथ रेणु एक आंचलिक कथाकार की कोटि में आते हैं , उन्होंने पूर्णिया जिले के औराही हिंगना ग्राम की भाषा क्षेत्र का वर्णन नहीं वरन पूरे जिले का वर्णन किया है । कोसी मैया की चपल तेज लहरों के साथ परतंत्रता और स्वतंत्रता का भी बखान किया है। फणीश्वरनाथ रेणु की रचनाएं "ठुमरी" और प्रतिनिधि कहानियों का संकलन है जिनमें गांव के जीते जागते जीवन का चित्रण मिलता है। रेणु जी गांव के चितेरे कथाकार हैं। इन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि आजादी के कई दशक तक पूर्णिया जिले के भाषा फूहड़ (फेनुगिलासी) बोली कहा है। उनकी रचनाओं का मुख्य लक्ष्य है - जीवन में नवीनता का आग्रह करना ............ ऐसे थे कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु जिनके दुख दर्द भरे कहानियों में वह गीत आज भी नहीं भुलाया जा सकते हैं - *************** “ सजनव ा बैरी मैले न . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . दुखिया हो त ो सब को ई बांटे भ...