मुंशी प्रेमचंद

लेखक परिचय :-

सर्वश्रेष्ठ उपन्यासकार कहानीकार प्रेमचंद का जन्म सन १८८० (1880)में बनारस लहरी गांव में हुआ था। इनका वास्तविक नाम धनपत राय था। घर के आर्थिक तंगी तथा पिता की असामयिक मौत के कारण इनका जीवन अभाव में बीता। इन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, परंतु गांधी जी से प्रभावित हो असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। इनके बाद में पूरी तरह से लेखक कार्य के प्रति समर्पित हो गए। इन्होंने गांव और शहर में जिस परिवेश को देखा उसी का वर्णन अपनी रचनाओं में किया है। इनकी रचनाओं के विषय किसानों और मजदूरों की शोचनीय स्थिति , दलितों का शोषण, समाज में नारी की दुर्दशा, स्वतंत्रता आंदोलन आदि से संबंधित है। इनकी भाषा सरल, सजीव तथा मुहावरेदार है। इन्होंने अपनी रचनाओं मैं अरबी ,फारसी और अंग्रेजी में प्रचलित शब्दों का प्रयोग कुशलता पूर्वक किया है। इन्होंने 'हंस', 'जागरण', 'माधुरी' आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। सन् 1936 मैं इस महान कथाकार का देहांत हो गया।

रचनाएं- इनकी कहानियां 'मानसरोवर'के आठ भागों मेंं संकलित हैैं
उपन्यास- "सेवासदन" , "प्रेमाश्रम" , "रंगभूमि" , "कायाकल्प" , "निर्मला" , "गवन" ,                 "कर्मभूमि" , "गोदान" , आदि उल्लेखनीय हैं।



                                                 प्रस्तुति :- मनोज कुमार पोद्दार
                                                                 

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